- by Amit Kumar Gond
- 2026-02-12 11:01:01
स्वदेशी इनक्रेडिबल न्यूज़
मुनाफे में चल रहे पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम को घाटे के नाम पर बेचने की साजिश : वाराणसी में सुनवाई के दौरान नियामक आयोग के सामने उठेगा निजीकरण का मुद्दा : झूठे आकड़ों और धमकी के बल पर निजीकरण करने की कोशिश कामयाब नहीं होने दी जायेगी - संघर्ष समिति
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, गोरखपुर ने कहा है कि झूठे आकड़ों, धमकी और दमन के बूते निजीकरण की साजिश कामयाब नहीं होने दी जायेगी। संघर्ष समिति द्वारा वाराणसी में टैरिफ की सुनवाई के दौरान निजीकरण का मुद्दा नियामक आयोग के सामने उठाकर निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त करने की मांग की जायेगी। आज लगातार 225वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रान्तव्यापी विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, के पदाधिकारियों ने इं. पुष्पेन्द्र सिंह, इं. जीवेश नन्दन , इं. जितेन्द्र कुमार गुप्त, इं. भानुप्रताप सिंह , इं. पंकज गुप्ता , इं. योगेश यादव, इं. शिवमनाथ तिवारी, सर्वश्री प्रभुनाथ प्रसाद, संगमलाल मौर्य, इस्माइल खान, संदीप श्रीवास्तव, विकास श्रीवास्तव, जगन्नाथ यादव, राकेश चौरसिया, राजकुमार सागर, विजय बहादुर सिंह, करुणेश त्रिपाठी, ओम गुप्ता, एवं सत्यव्रत पांडे, आदि तथा जे ई संगठन के पदाधिकारियों इं. शिवम चौधरी, इं. अमित यादव, इं. विजय सिंह, इं. श्याम सिंह, इं. एन के सिंह , इं. देवेन्द्र पाण्डे, इं. भारतेन्दु चौबे, इं. प्रमोद यादव एवं इं. रणंजय पटेल आज यहां बताया कि निजी घरानों को मदद देने के लिए विद्युत वितरण निगमों ने निजीकरण के पहले ही टैरिफ में 45 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव नियामक आयोग को भेज कर निजीकरण के बाद बिजली दरों में होने वाली बेतहाशा वृद्धि का संकेत दे दिया है। उन्होंने बताया कि विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के पदाधिकारी और बिजली कर्मी 11 जुलाई को वाराणसी में नियामक आयोग के सामने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का मुद्दा जोर-शोर से उठायेंगे।
संघर्ष समिति ने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में कुल 6327 करोड़ रूपये की सब्सिडी विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं को दी जा रही है। अत्यन्त दुर्भाग्य का विषय है कि सरकार की कैश फंडिंग के नाम पर पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन इस सब्सिडी को कैश गैप में जोड़ कर घाटे में दिखा रहा है। इससे ऐसा लगता है कि निजीकरण के बाद किसानों, बुनकरों और गरीब घरेलू उपभोक्ताओं की सब्सिडी समाप्त करने की तैयारी है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में 5321 करोड़ रूपये टैरिफ की सब्सिडी है, निजी नलकूपों के लिए 376 करोड़ रूपये की सब्सिडी है और बुनकरों के लिए 630 करोड़ रूपये की सब्सिडी है। इस प्रकार कुल 6327 करोड़ रूपये की सब्सिडी विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं को पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में दी जा रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में वर्ष 2024-25 में उपभोक्तओं से 13297 करोड़ रूपये राजस्व वसूल किया गया। सरकारी विभागों पर 4182 करोड़ रूपये का राजस्व बकाया है जो सरकारी विभागों ने नहीं दिया है। सरकारी विभागों का राजस्व बकाया देना सरकार की जिम्मेदारी है। सरकारी विभागों का राजस्व जोड़ लिया जाये तो वर्ष 2024-25 में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का कुल राजस्व 17479 करोड़ रूपये हो जाता है।
17479 करोड रुपए में 6327 करोड रुपए सब्सिडी जोड़ देने के बाद कुल आय 23806 करोड़ रुपए हो जाती है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम ने विद्युत नियामक आयोग को बताया है कि वर्ष 2024-25 का कुल खर्चा लगभग 20564 करोड़ रूपये है। इस प्रकार वर्ष 2024-25 में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम को 3242 करोड़ रूपये का मुनाफा हो रहा है जब कि झूठे आंकड़े दिखाकर घाटे के नाम पर निजीकरण किया जा रहा है ।
पावर कारपोरेशन प्रबन्धन मुनाफे में चल रहे पूर्वांचल पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का झूठे आंकड़े देकर बढ़ाचढ़ा कर घाटा दिखा रहा है और इस आधार पर निजीकरण किया जा रहा है। संघर्ष समिति प्रबन्धन के झूठे आंकड़ों के आधार पर निजीकरण के प्रस्ताव के विरोध में 11 जुलाई को वाराणसी में नियामक आयोग के सामने तथ्य रख कर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त करने की मांग करेगी।
संघर्ष समिति ने कहा है कि निजीकरण के लिए झूठे आकडों के साथ भय का वातावरण बनाया जा रहा है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में हजारों बिजली कर्मियों का वेतन रोक दिया गया है, हजारों बिजली कर्मचारियों को दूरस्थ स्थानों पर ट्रांसफर कर दिया गया है और परामर्श के नाम पर चेतावनी के पत्र भेजे जा रहे हैं। संघर्ष समिति के 6 केन्द्रीय पदाधिकारियों के विरूद्ध स्टेट विजिलेंस की जांच के जरिये अनानुपातिक आय का फर्जी मामला बनाया जा रहा है। 3 केन्द्रीय पदाधिकारियों पर एफ आई आर की जा चुकी है। 3 अन्य पदाधिकारियों पर एफ आई आर की तैयारी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी इन हथकण्डों से डरने वाले नहीं हैं और निजीकरण के विरोध में संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता।
बिजली के निजीकरण के विरोध में आज वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, हरदुआगंज, जवाहरपुर, परीक्षा, पनकी, ओबरा, पिपरी और अनपरा में विरोध सभा हुई।
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Er. Shakti Shankar Singh (Chief Editor)