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विश्व शांति मिशन की मासिक काव्य गोष्ठी संपन्न “जाने कल आप और हम कहां होंगे, जहान में मेरी तुरबत के बस निशां होंगे”

इस खबर के स्पोंसर है सॉफ्टनिक इंडिया, शाही मार्केट, गोलघर, गोरखपुर


गोष्ठी का शुभारंभ सरस्वती वंदना के साथ श्रीमती प्रेमलता रसविंदु ने किया। इसके पश्चात देश, समाज और जीवन पर केंद्रित कविताओं और ग़ज़लों की शानदार प्रस्तुतियां हुईं।

वरिष्ठ कवि डॉ. अविनाशपति त्रिपाठी ने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा –
"सरकार धन्य है क्योंकि महंगाई शून्य है।"

वहीं वरिष्ठ शायर महमूद भाई ने अपने शेरों से देश के हालात पर कटाक्ष किया –
"शबनम भी रो रही है यहां हाल पर मेरे,
इक पल को भी सुकून नहीं अहले बहार में।"

डॉ. सत्य नारायण पथिक की ग़ज़ल "किया हमने गर आपरेशन सिंदूर,
आतंक के गढ़ में खौफ यूं हुआ है।"
को श्रोताओं से खूब सराहना मिली।

संस्था के संयोजक अरुण ब्रह्मचारी ने अपने भावपूर्ण शेर –
"जाने कल आप और हम कहां होंगे,
जहान में मेरी तुरबत के बस निशां होंगे।"

से समां बांध दिया।

अध्यक्षता कर रहे डॉ. हनुमान प्रसाद चौबे ने जीवन दर्शन पर आधारित पंक्तियां प्रस्तुत कीं –
"जीवन है बढ़ते रहना, रुकना समझो मृत्यु समान,
सहवर्ती का सेवा भाव, मीत जीवन का सुंदरभान।"

कार्यक्रम में श्रीमती प्रेमलता रसविंदु, हाजी मकबूल अहमद मंसूरी सहित कई अन्य कवियों ने भी काव्य पाठ किया।

गोष्ठी के समापन पर संस्था प्रमुख अरुण ब्रह्मचारी ने सभी कवियों, श्रोताओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

Support India to emerge as a knowledge society by identifying and nurturing the inner strength of youth and rural people, so that India can be transformed into a developed nation..

Er. Shakti Shankar Singh (Chief Editor)

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