- by Amit Kumar Gond
- 2026-02-12 11:01:01
स्वदेशी इनक्रेडिबल न्यूज़
दिनांकः 21.06.2025
सम्मान्य सम्पादक महोदय,
सार्वभौम गृहस्थ संत नित्यलीलालीन भाईजी श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार एवं प्रीतिरसावतार महाभावनिमग्न श्रीराधाबाबा की तपोभूमि गीतावटिका प्रांगण में स्थित श्रीराधाकृष्ण साधना मंदिर के 40वें पाटोत्सव के उपलक्ष्य में दिनांक 20 जून से 28 जून 2025 तक श्रीविग्रहों का सहस्रार्चन एवं श्रीरामचरितमानस की नौ दिवसीय कथा श्रंखला का आयोजन भक्तिभाव से चल रहा है।
द्वितीय दिवस पर, परम भक्त श्रीहनुमानजी का सिंदूर द्वारा सहस्रार्चन अत्यंत श्रद्धा, निष्ठा एवं विधिपूर्वक संपन्न हुआ। समस्त श्रद्धालुओं ने एकाग्रचित्त होकर श्रीहनुमानजी के सहस्र नामों का उच्चारण करते हुए सिंदूर अर्पित किया। पूजन स्थल "ॐ अञ्जनीसुताय नमः", "ॐ रामदूताय नमः", "ॐ संकटमोचनाय नमः" जैसे पावन मंत्रों से गुंजायमान हो उठा। प्रत्येक सिंदूर अर्पण के साथ भक्तों ने श्रीहनुमानजी से बल, बुद्धि, विद्या एवं विजय का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना की।
इसी क्रम में श्रीरामचरितमानस की द्वितीय दिवस की कथा का वाचन एवं प्रवचन श्रीधाम वृंदावन से पधारे पूज्य श्रीहरिकृष्ण दासजी महाराज (श्रीचितरंजन दासजी) के सान्निध्य में संपन्न हुआ। कथा में महाराजश्री ने बालकाण्ड के मध्य प्रसंगों को बड़े ही सरस, भावपूर्ण एवं ज्ञानमय शैली में प्रस्तुत किया।
उन्होंने देवताओं की पुकार, पृथ्वी की करुण पुकार, ब्रह्मा, शिव और नारद संवाद, और भगवान विष्णु के अवतरण के संकल्प जैसे प्रसंगों की विवेचना करते हुए कहा कि जब अधर्म और अत्याचार अपनी सीमा पार कर जाते हैं, तब धर्म की पुनर्स्थापना के लिए स्वयं परमात्मा को अवतरित होना पड़ता है।
उन्होंने यह भी बताया कि भगवान राम का अवतार केवल अयोध्या ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण चराचर जगत के कल्याण के लिए हुआ। कथा के दौरान भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुति ने वातावरण को अत्यंत भक्तिपूर्ण एवं भावविभोर बना दिया।
श्रद्धालुजनों ने पूज्य महाराजश्री की वाणी से रामकथा का रसास्वादन करते हुए अत्यंत शांति, श्रद्धा एवं भक्ति के साथ आयोजन का लाभ प्राप्त किया।
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Er. Shakti Shankar Singh (Chief Editor)