- by Amit Kumar Gond
- 2026-02-12 11:01:01
स्वदेशी इनक्रेडिबल न्यूज़
टल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में भारत ने 1998 में पोखरण-II परमाणु परीक्षण कर पूरी दुनिया को चौंका दिया था। यह भारत की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए ऐतिहासिक निर्णय था, लेकिन इसके साथ ही अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों ने भारत पर कठोर आर्थिक प्रतिबंध भी लगा दिए।
राष्ट्रपति बिल क्लिंटन उस समय भारत पर दबाव बनाने में जुटे थे। उन्होंने अमेरिकी विदेश विभाग के ज़रिए भारतीय दूतावास को यहाँ तक धमकी दी कि— “मैं बर्लिन के लिए 6 घंटे की यात्रा पर निकल रहा हूँ, उससे पहले दिल्ली से ‘No First Use (NFU)’ समझौते पर हस्ताक्षर करवा लो।”
लेकिन भारत ने दबाव के आगे झुकने से इनकार किया। दिल्ली से भारतीय राजदूत को स्पष्ट संदेश गया— “दो दिन प्रतीक्षा करें।”
यह छोटा-सा वाक्य भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मसम्मान का प्रतीक बन गया। वाजपेयी सरकार ने साफ कर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक नीति पर बाहरी दबाव स्वीकार्य नहीं होगा।
👉 पोखरण-II ने न सिर्फ भारत को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र के रूप में स्थापित किया, बल्कि दुनिया को यह भी संदेश दिया कि भारत अपनी शर्तों पर वैश्विक राजनीति में भाग लेगा।
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Er. Shakti Shankar Singh (Chief Editor)