- by Manish Kumar Susari
- 2026-02-16 15:44:37
स्वदेशी इनक्रेडिबल न्यूज़
सार्वभौम गृहस्थ संत *नित्यलीलालीन परम श्रद्धेय भाईजी श्रीहनुमान प्रसाद जी पोद्दार एवं पूज्य श्रीराधाबाबा की तपोभूमि गीता वाटिका प्रांगण में श्रीभाईजी की 132वें जयंती के अवसर पर पूज्य श्री नरहरि दास जी महाराज के व्यासत्व में दिनांक 21 सितंबर से 28 सितंबर तक श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया है।*
कथा का शुभारंभ विधिवत पूजन अर्चन के साथ हुआ। द्वितीय दिवस की कथा में पूज्य श्रीनरहरि दास जी महाराज ने श्रीमद्भागवत अष्टदिवसीय कथा के अवसर पर व्यासपीठ से कहा कि भाईजी शब्द एक ही महापुरुष के लिए कहा गया है। आप कही भी जाय घर से या़त्रा प्रारम्भ करते समय नारायण- नारायण शब्द का नाम सदैव जप करना चाहिए।
नारायण शब्द भगवान् श्रीकृष्ण जी के लिए प्रयोग किया गया है।उन्होनें कहा कि यह उनका ही नाम है। प्राणियों का कल्याण अहैतुकी भक्ति से होता है। अहैतुकी का अर्थ है जो भक्ति बिना कारण के की जाय। वही अहैतुकी भक्ति होती है। ब्रहम, परमात्मा एवं भगवान् यह तीनों ही तत्व बहुत ही प्रमुख तत्व है। उन्हानें कहा कि किसी भी व्यक्ति का किसी दूसरे की निन्दा या हीनता को न ही सुनना और न ही देखना चाहिए।
श्री सरस्वती पाठ में यह सपष्ट है कि श्रीकृष्ण से कोई श्रेष्ठ तत्व है यह हम नहीं जानते। बाबाजी कहते है कि प्रिया-प्रियतम सर्वत्र अवस्थित, सर्वत्र व्याप्त है। हमेशा जय जय प्रियतम- जय जय प्रियतम का जप करना चाहिए।
श्रद्धेय बाबूजी पद-रत्नाकर में कहते है कि ‘‘नाथ अब कैसे हो कल्याण........।’’ व्यासपीठ से उन्होनें कहा कि बाबू जी के कृतित्व के विषय में अद्भुत ढंग से परिचय दिया। और बताया कि गीता-वाटिका की महिमा अपार है। यह बाबूजी एवं बाबाजी कर्मभूमि है यहाँ कण- कण में प्रिया-प्रियतम का वास होता है। यह भूमि पूज्य है।
कार्यक्रम का समापन श्रीभागवत जी की आरती के साथ सम्पन्न हुआ। तृतीय दिवस की कथा सायं 03 बजे से प्रारम्भ होगी। इस अवसर पर भगवत्प्रेमी श्रद्धालुजनों की अपार उपस्थिति रही। समिति के पदाधिकारी श्रीउमेश कुमार सिंहानिया, श्रीरसेन्दु फोगला के साथ ही श्रीदीपक गुप्ता, श्रीराकेश तिवारी, श्रीहीरालालजी त्रिपाठी सहित अनेक गणमान्य लोगों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
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Er. Shakti Shankar Singh (Chief Editor)