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सार्वभौम गृहस्थ संत नित्यलीलालीन परम श्रद्धेय *भाईजी श्रीहनुमान प्रसाद जी पोद्दार एवं पूज्य श्रीराधाबाबा* की तपोभूमि गीता वाटिका प्रांगण में श्रीभाईजी की १३२वें जयंती के अवसर पर *पूज्य श्री नरहरि दास जी महाराज* के व्यासत्व में दिनांक 21 सितंबर से 28 सितंबर तक *श्रीमद्भागवत कथा* का आयोजन किया गया हैI

इस खबर के स्पोंसर है सॉफ्टनिक इंडिया, शाही मार्केट, गोलघर, गोरखपुर


सार्वभौम गृहस्थ संत नित्यलीलालीन परम श्रद्धेय *भाईजी श्रीहनुमान प्रसाद जी पोद्दार एवं पूज्य श्रीराधाबाबा* की तपोभूमि गीता वाटिका प्रांगण में श्रीभाईजी की १३२वें जयंती के अवसर पर *पूज्य श्री नरहरि दास जी महाराज* के व्यासत्व में दिनांक 21 सितंबर से 28 सितंबर तक *श्रीमद्भागवत कथा* का आयोजन किया गया हैI

इस अवसर पर आज दिनांक 21 सितंबर 2024 को पूज्य श्रीनरहरि दास जी महाराज के व्यासत्व में एक शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा पूज्य भाईजी श्रीहनुमान प्रसाद पोद्दार के पावन कक्ष से प्रारंभ होकर श्रीभाईजी के पावन समाधि स्थल, पूज्य श्रीराधाबाबा की समाधि, गिरिराज परिसर होते हुए कथा स्थल पर जाकर संपन्न हुई। 

कथा का शुभारंभ विधिवत पूजन अर्चन के साथ हुआ। प्रथम दिवस की कथा में पूज्य श्रीनरहरि दास जी महाराज ने *श्रीमद्भागवत अष्टदिवसीय कथा के प्रथम दिवस* पर व्यासपीठ से श्रीमद्भागवत पुराण के माहात्म्य के बारे में उपस्थित श्रद्धालु भक्तजनों को विस्तार से बताते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण के प्रथम अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण का वन्दन किया गया है। उन्होंने कहा कि श्रीवेदव्यास जी ने बताया है कि भगवान् श्रीकृष्ण को प्रणाम करने वाले व्यक्ति को 10 अश्वमेघ यज्ञ के बराबर फल प्राप्त होता है। साथ ही युगल सरकार के चरणों में किया गया प्रणाम अवर्णनीय एवं अत्यन्त फल देने वाला होता है।

उन्होंने बताया कि गीता वाटिका के परिप्रेक्ष्य में हम कहें तो पूज्य बाबूजी एवं श्रीबाबाजी द्वय को प्रणाम करना युगल सरकार के आशीर्वाद प्राप्त करने के समान हैं। श्रीभागवत कथा महापुराण के प्रथम श्लोक के दो पंक्तियों में भगवान श्रीकृष्ण को प्रणाम करने के बारे में बताया गया है तथा दूसरे श्लोक में शुकदेवजी को चार पंक्तियों में प्रणाम के बारे में बताया गया है। इस प्रकार गुरू की महत्ता को विशेष महत्व किया गया है। बिना गुरू की कृपा से ईश्वर की प्राप्ति नहीं हो सकती है इस हेतु सद्गुरूओं का साष्टांग वंदन करें, उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। उनके सान्निध्य में ही अज्ञानरूपी अंधकार का विनाश होता है। जिस व्यक्ति में भक्ति हो, वैराग्य हो, ज्ञान हो वह सदैव भगवान का कृपा पात्र बनता है। 

व्यासपीठ से उन्होंने कहा कि हरि भजन के बिना एक भी पल निरर्थक है। भगवान की सेवा में सावधानी अत्यन्त आवश्यक होती है। श्रीभागवत जी की कथा का श्रवण करने में भी सावधानी बहुत जरूरी है जिससे एक-एक शब्द हमारे मन के भीतर समा जायें। एक-एक शब्द का बहुत महत्व होता है। कथा अमृत का पान करने में गुरू के समक्ष आठों पहर बैठना पड़ता है। पतितों का उद्धार करने के कारण ही आप का नाम पतित पावन है। आप हमारे भावों पर ध्यान दें न कि हमारे अवगुणों पर। अवगुणों का तो कोई अंत ही नहीं है। भारतवर्ष के सभी गुरूजन बाबूजी से सदैव स्नेह रखते हुए बहुत ही लाभान्वित हुए है। बाबूजी ने सभी पुराणों का हिन्दी में अनुवाद करवाकर सभी सनातन धर्मावलम्बियों को लाभान्वित किया है। इस कार्य के लिए हम बाबूजी के सदैव कृतज्ञ हैं और रहेंगे। श्रीभागवत रस के रसपान के सिवाय किसी अन्य रस की कोई आवश्यकता नहीं है। इस भक्तामृत का पान सभी को नहीं मिलता। यह भाव से भरे हुए भक्तों को ही सिर्फ प्राप्त होता है। 

कार्यक्रम का समापन श्रीभागवत जी की आरती के साथ सम्पन्न हुआ। द्वितीय दिवस की कथा सायं 03 बजे से प्रारम्भ होगी। इस अवसर पर भगवत्प्रेमी श्रद्धालुजनों की अपार उपस्थिति रही। समिति के पदाधिकारी श्रीउमेश कुमार सिंहानिया, श्रीरसेन्दु फोगला के साथ ही श्रीदीपक गुप्ता, श्रीराकेश तिवारी, श्रीहीरालालजी त्रिपाठी सहित अनेक गणमान्य लोगों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही

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Er. Shakti Shankar Singh (Chief Editor)

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