- by Mahtab Alam
- 2026-07-15 20:12:55
स्वदेशी इनक्रेडिबल न्यूज़
किसानों का कहना है कि अधिकांश खेतों की जुताई पूरी हो चुकी है। कहीं-कहीं अंतिम तैयारी भी कर ली गई है, लेकिन बारिश न होने से मिट्टी सूखकर पपड़ी बन गई है। खेत तैयार होने के बावजूद रोपाई शुरू नहीं हो पा रही है। डीजल और मजदूरी की बढ़ती लागत ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ऐसे में अब किसानों की निगाहें केवल अच्छी बारिश पर टिकी हैं।
शंकरगढ़ और उससे लगे मध्य प्रदेश सीमा क्षेत्र के किसानों ने लगभग 15 दिन पहले ही खेत तैयार कर लिए थे। धान की नर्सरी (बेहन) अब 22 दिन की हो चुकी है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो नर्सरी खराब होने का खतरा बढ़ जाएगा और उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों खेतों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। जहां इस समय ट्रैक्टरों की आवाज और मजदूरों की चहल-पहल दिखाई देनी चाहिए थी, वहां किसान खेतों की मेड़ पर खड़े होकर आसमान की ओर टकटकी लगाए बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष जून माह में अच्छी बारिश होने से समय पर धान की रोपाई हो गई थी, लेकिन इस वर्ष बादल तो आते हैं, गरजते हैं और बिना बरसे लौट जाते हैं। किसानों को उम्मीद है कि आषाढ़ नक्षत्र में अच्छी वर्षा होगी और खेती का कार्य समय रहते शुरू हो सकेगा।
यदि शीघ्र ही पर्याप्त वर्षा नहीं हुई और नहरों में पानी की आपूर्ति नहीं बढ़ाई गई, तो प्रयागराज के कई क्षेत्रों में खरीफ की फसल पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
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Er. Shakti Shankar Singh (Chief Editor)