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विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, गोरखपुर

इस खबर के स्पोंसर है सॉफ्टनिक इंडिया, शाही मार्केट, गोलघर, गोरखपुर


विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति,

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को सर्वाधिक समय प्रदेश का मुख्यमंत्री रहने पर बधाई देते हुए संघर्ष समिति ने निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की मांग की : विधानसभा के मानसून सत्र के पहले सभी विधायकों को निजीकरण के पीछे हो रहे घोटाले से अवगत कराया जाएगा : अभद्र भाषा प्रयोग करने का ऊर्जा मंत्री का आरोप गलत*

           विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, गोरखपुर ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी को सर्वाधिक समय तक लगातार प्रदेश का मुख्यमंत्री रहने पर बधाई देते हुए एक बार पुनः उनसे अनुरोध किया है कि वे ऊर्जा विभाग की कमान खुद संभाले और निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की कृपा करें। संघर्ष समिति ने यह भी निर्णय लिया है कि विधानसभा के मानसून सत्र के पहले बिजली के निजीकरण के पीछे हो रहे घोटाले से सभी विधायकों को अवगत कराया जाएगा। 

         विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, गोरखपुर ने ऊर्जा मंत्री के x पर किए गए बिजली कर्मियों के विषय में ट्वीट पर टिप्पणी करते हुए कहा है की बिजली कर्मी कभी अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करते और जिस तरह विदेश यात्रा से टोरेंट के निजीकरण को जोड़ा गया है वह पूर्णतया निराधार और भ्रम फैलाने वाला है। 

          विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति गोरखपुर के पदाधिकारियों सीबी उपाध्याय, इस्माइल खान, पुष्पेन्द्र सिंह, जीवेश नन्दन , जितेन्द्र कुमार गुप्त, अमित यादव , विजय सिंह, प्रभुनाथ प्रसाद, संगमलाल मौर्य, संदीप श्रीवास्तव, विमलेश पाल, राकेश चौरसिया, विजय बहादुर सिंह, करुणेश त्रिपाठी, राजकुमार सागर आदि ने आज यहां बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण घाटे के झूठे आंकड़े देकर और बिजली कर्मचारियों में भय का वातावरण बना कर किया जा रहा है। संघर्ष समिति ने निर्णय लिया है कि पावर कॉरपोरेशन की ऑडिटेड बैलेंस शीट सभी विधायकों को भेजी जाएगी। इस बैलेंस शीट के माध्यम से स्पष्ट किया जाएगा कि सब्सिडी की धनराशि और सरकारी विभागों के बिजली राजस्व के बकाए की धनराशि जोड़कर घाटा दिखाया जा रहा है जो निजीकरण की एक साजिश है। 

        संघर्ष समिति ने कहा कि जिस ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का आधार बनाया जा रहा है वह ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट आज तक पब्लिक डोमेन में नहीं है। इतना ही नहीं तो भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय ने ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आज तक राज्य सरकार और राज्यों के विद्युत वितरण निगमों को न तो सर्कुलेट किया है और न ही इस पर कोई आपत्ति मांगी है। संघर्ष समिति ने सवाल उठाया कि ऐसे में लाखों करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों को ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आधार मानकर कैसे बेचा जा सकता है ?

        संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति भी अवैध ढंग से की गई है। ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में पहले हितों के टकराव का प्राविधान हटा दिया गया फिर मेसर्स ग्रांट थॉर्टन द्वारा झूठा शपथ पत्र देने का फर्जीवाडा सामने आने के बावजूद इसी कंपनी से निजीकरण के दस्तावेज तैयार कराये गए। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों का और रेवेन्यू पोटेंशियल का मूल्यांकन किए बिना आरएफपी डॉक्यूमेंट में एक लाख करोड रुपए की परिसंपत्तियों को बेचने की रिजर्व प्राइस मात्र 6500 करोड रुपए रख दी गई।

        संघर्ष समिति निजीकरण के पीछे हो रहे इन तमाम घोटालों को अगले 15 दिन तक सम्मानित विधायकों के सामने रखेगी। 

       संघर्ष समिति ने ऊर्जा मंत्री के x पर लिखी गई टिप्पणी पर कहा है कि विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी को नोटिस भेज कर 22 जुलाई को मिलने का समय मांगा था। संघर्ष समिति ऊर्जा मंत्री जी से मिलकर यह पूछना चाहती थी कि 03 दिसंबर 2022 और 19 मार्च 2023 को उनके द्वारा संघर्ष समिति के साथ किए गए समझौते का क्रियान्वयन क्यों नहीं हो रहा है ? और इस समझौते के अनुसार बिजली कर्मियों पर उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां आज तक क्यों नहीं वापस ली गई ? और आज भी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों किस आधार पर की जा रही है ? 

        संघर्ष समिति ने कहा कि मौके पर पुलिस के बड़े अधिकारी भी मौजूद थे जो संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों के लगातार संपर्क में थे। पूरे घटनाक्रम का वीडियो फुटेज माननीय ऊर्जा मंत्री जी के पास होगा ही पुलिस के पास भी होगा। बिजली कर्मी शांतिपूर्ण ढंग से समझौतों का क्रियान्वयन न होने पर ऊर्जा मंत्री के प्रति अपना विरोध दर्ज कर रहे थे। किसी ने उनके परिवार के प्रति किसी अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं किया। संघर्ष समिति का इतिहास रहा है कि वह सदा ही गांधीवादी ढंग से सत्याग्रह आंदोलन करती है ।कभी अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं किया जाता।

        संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 243 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर बिजली के निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में अपना प्रदर्शन जारी रखा। संघर्ष समिति ने कहा है कि बिजली के निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में तब तक संघर्ष जारी रहेगा जब तक यह वापस नहीं लिया जाता।

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Er. Shakti Shankar Singh (Chief Editor)

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