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क्या यही विकास है? भूखमरी की कगार पर ई-रिक्शा चालक

इस खबर के स्पोंसर है सॉफ्टनिक इंडिया, शाही मार्केट, गोलघर, गोरखपुर


ई-रिक्शा चालकों ने जोन व्यवस्था को बताया रोज़ी-रोटी पर संकट, यातायात विभाग को सौंपा ज्ञापन

गोरखपुर। शहर में ई-रिक्शा चालकों की बड़ी संख्या ने जोन व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। चालकों का कहना है कि जोन में बाँटने के कारण अब वे अपनी मर्जी से एक जोन से दूसरे जोन में सवारी नहीं ले जा सकते, जिससे उनकी आमदनी आधे से भी कम हो गई है। इस संबंध में चालकों ने यातायात विभाग, गोरखपुर को एक ज्ञापन सौंपकर जोन व्यवस्था को तत्काल समाप्त करने की मांग की है। चालकों का कहना है कि इस व्यवस्था से न केवल उनका भरण-पोषण मुश्किल हो गया है, बल्कि स्कूलों की फीस, किताबें, राशन, बिजली का बिल तक चुकाना भी दूभर हो गया है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि अब यदि वे किसी सवारी को दूसरे जोन में ले जाते हैं तो उन पर 500 रुपये से लेकर 12,000 रुपये तक के चालान किए जा रहे हैं, और गाड़ी सीज होने का डर बना रहता है। इससे परेशान होकर अब बहुत से सवारी यात्री ई-रिक्शा की जगह CNG या सिटी बसों का उपयोग करने लगे हैं, जिससे ई-रिक्शा चालकों की आय और भी घट गई है। चालकों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि किसी बीमार व्यक्ति को अस्पताल या रेलवे स्टेशन जैसे स्थानों पर ले जाना हो, जो दूसरे जोन में आते हैं, तो चालकों के सामने कानूनी कार्रवाई का खतरा खड़ा हो जाता है। ई-रिक्शा यूनियन ने साफ कहा है कि अगर जोन व्यवस्था वापस नहीं ली गई, तो उन्हें मजबूरन सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करना पड़ेगा।

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Er. Shakti Shankar Singh (Chief Editor)

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